कहीं दिन दिया है तो कहीं रात दी है।
कहीं प्यास की शिद्दत तो कहीं बरसात दी है।
अजीब फितरत है नेअमतें देने वाले की,
किसी को कुछ नही तो किसी को कायनात दी है।
कुछ तरसते हैं चंद खूबियों को उम्रभर,
एक तुम हो कि जिसे हर बात दी है।
शानों पे तेरी जुल्फें सावन कि कशिश हैं,
चेहरा परी सूरत आंखों में हयात दी है।
पूनम का चाँद भी है तेरे रुखसार से रौशन,
सुर्खिये लवों को शोखिये गुलाब दी है।
मौजों के तसब्बुर, एक रोज ख्याल आया,
तेरे चलने की अदा लहरों को भी मात दी है।
मौजों - समंदर
1 comment:
Lihaj ji,
aapki gazal neamat parhi, umda hai.
badhai ho.
Mahendra Awdhesh
New Delhi
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