नूरे मुजस्सम हिसाब से ज्यादा।
एक चेहरा हसीं है माहताब से ज्यादा।
आंखें कहूँ कि मयखाना कह दूँ,
निगाहों में नशा है शराब से ज्यादा।
सुबह की किरण रुख्सार की लाली,
सुर्खिए लव है गुलाब से ज्यादा।
फ़िर कैसे पढें तह्रीरे सूरत,
चेहरे पे लिखा है किताब से ज्यादा।
क्या करें नज़र हटती ही नही,
दिलकश है वो हिसाब से ज्यादा।
नूरे मुजस्सम - नूर का बना हुआ
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