हालात बदले तकदीर न बदली,
सरापा बदला तस्वीर न बदली।
गुलामी कल भी थी गुलामी आज भी है,
सय्याद बदला है, जंजीर न बदली।
ये लकीरें हाथ की हैं मिटाए नही मिटतीं,
हुकूमत बदली तहरीर न बदली।
आज भी लटकी है गर्दन पर गरीब के,
धार बदली है शम्शीर न बदली।
शम्शीर - तलवार