गीत, ग़ज़ल, शायरी में तुम।
दिल, जिगर, आशिकी में तुम।
हिन्दी कि अदा में, उर्दू के नाज़ में,
कविता, नज़्म, सादगी में तुम।
जितना हसीं है दिल, उतनी ही हसीं रात,
अंधेरों में तुम, रौशनी में तुम।
ख्वाहिश में, दुआ में, ज़रूरत में,
दिल के करार में, तिश्नगी में तुम।
तन्हाईयां भी तुमसे, महफिलें भी तुमसे।
ग़म के साए में, हर खुशी में तुम,
लहू बहता है जैसे रगों में ' लिहाज़ ',
कुछ ऐसे बस गए हो जिंदगी में तुम।
तिश्नगी - प्यास
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