यादों का तसब्बुर और तन्हाई का आलम,
तेरी जुल्फों पे जा ठहरा है ख्याल आरायी का आलम।
तुझे सोचा तो ख्यालों में रंगे बहार आई,तेरी जुल्फों पे जा ठहरा है ख्याल आरायी का आलम।
रह रहकर याद आया तेरी अंगडाई का आलम।
गुल में, गुलज़ार में छुपा है रंगीनिये बाहर में,
हुस्न आराई का आलम, तेरी रानाई का आलम।
शौके दीदार में कश्ती ऐ जां पे बनी है,
तेरी आंखें नक्श है एक गहराई का आलम।
मायूस चाहतों की अंजुमन में मोहब्बत को क्या मिला,
फ़कत एक दर्द का मौसम महज़ एक रुस्बायी का आलम।
हमसफ़र है तो ' लिहाज़ ' उजालों की रहगुजर तक,
बिल्कुल तेरे जैसा है मेरी परछाई का आलम.
ख्याल आरायी - ग़ज़ल का मौजू या सब्जेक्ट
हुस्न आरायी - हुस्न की सजावट
रानाई - सुन्दरता
No comments:
Post a Comment